El Niño का बढ़ता खतरा: क्या भारत में कमजोर पड़ जाएगा मानसून? IMD और वैज्ञानिकों की नई चेतावनी

El Niño 2026 का भारत के मानसून पर क्या होगा असर? जानिए IMD और WMO की ताजा चेतावनी, किन राज्यों में होगी भारी बारिश, क्या कमजोर पड़ेगा मानसून, किसानों पर क्या होगा प्रभाव और आने वाले दिनों का पूरा मौसम अपडेट।

7/22/20261 min read

भारत में मानसून के बीच El Niño को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। विश्व मौसम संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि जुलाई से सितंबर 2026 के बीच El Niño तेजी से विकसित हो सकता है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के पैटर्न प्रभावित होने की आशंका है। भारत भी उन देशों में शामिल है जहां इसका असर मानसून, कृषि और जल संसाधनों पर पड़ सकता है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि 22 जुलाई तक देश के कई राज्यों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इससे साफ है कि El Niño का असर होने के बावजूद पूरे देश में बारिश बंद होने जैसी स्थिति फिलहाल नहीं है।

El Niño क्यों बढ़ा रहा है चिंता?

El Niño एक ऐसी जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इससे वैश्विक मौसम प्रणाली प्रभावित होती है और भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है। इस वर्ष NOAA ने पहले ही El Niño बनने की प्रबल संभावना जताई थी, जबकि WMO ने इसके और मजबूत होने का संकेत दिया है।

क्या अब बारिश नहीं होगी?

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका जवाब 'नहीं' है।

El Niño का मतलब यह नहीं कि पूरे भारत में बारिश रुक जाएगी। इसके बजाय:

  • कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।

  • कुछ इलाकों में अचानक भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है।

  • मानसून का वितरण असमान हो सकता है।

हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में भी कहा गया है कि El Niño हर बार सूखा नहीं लाता, बल्कि कई क्षेत्रों में वर्षा के पैटर्न को अस्थिर बना देता है।

किसानों और अर्थव्यवस्था पर असर

यदि El Niño मजबूत होता है तो इसका असर सबसे पहले कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं। कमजोर मानसून से जलाशयों का स्तर, सिंचाई और खाद्य कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी चेतावनी दी है कि कमजोर मानसून और ऊंची तेल कीमतें भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए प्रमुख जोखिम बन सकती हैं।

अगले कुछ सप्ताह क्यों हैं अहम?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जुलाई के अंत और अगस्त की शुरुआत यह तय करेगी कि El Niño कितना मजबूत होता है और उसका भारतीय मानसून पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ेगा। IMD लगातार समुद्री तापमान, मानसूनी हवाओं और अन्य मौसम प्रणालियों की निगरानी कर रहा है।

निष्कर्ष

फिलहाल भारत में मानसून सक्रिय है और कई राज्यों में भारी बारिश जारी है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि El Niño के कारण बारिश पूरी तरह खत्म हो जाएगी। लेकिन यदि आने वाले हफ्तों में El Niño और मजबूत होता है, तो मानसून की रफ्तार, बारिश का वितरण और कृषि पर इसका असर देखने को मिल सकता है। ऐसे में मौसम विभाग के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।

Insights

Stay updated on trending topics across fields.

Explore

Connect

info@classicblogging.com

© 2025. All rights reserved.